January 08, 2012

मूर्तियों की माया पर पर्दा


चुनाव आयोग ने यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेश में राज्य की मुख्यमंत्री मायावती और उनके चुनाव निशान हाथी की मुर्तियों पर पर्दा डालने की बात की है। मुख्य चुनाव आयुक्त का मानना है कि इन मुर्तियों के खुले रहने से राजनीतिक संदेश जाता है इसलिए इनको ढका जाना चाहिए। क्योंकि हाथी बीएसपी के प्रचार का तरीका है और मायावती इसकी सुप्रीमो। इस पर बसपा बुरी तरह आक्रोशित है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग का यह निर्णय तर्कसंगत नहीं है। आयोग के इस निर्णय पर बसपा ने कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है देश में कई जगह हाथियों की मुर्तियां या तो दरवाजों पर लगी हैं या लोगों ने अपने घरों की शोभा बढ़ाने के लिए लगा रखीं है। यहां तक कि राष्ट्रपति भवन और संसद में भी हाथी लगे हैं। क्या उनको भी ढका जाएगा इसके अलावा बसपा ने यह भी कहा कि प्रदेश में साइकिल को चलने से बंद किया जाए, तलाबों में खिलाने वाले कमल के फूलों को ढका जाए। कांग्रेस पर निशाना सधाते हुए कहा कि देश की समस्त जनता को हाथ ढकने का आदेश दिया जाए। क्योंकि यह सब भी तो सपा, भाजपा और कांग्रेस के चुनाव निशाना हैं। इसके अलावा तर्क दिए गए कि चैराहों पर नेताओं की मुर्तियां है उनका क्या होगा? बसपा का मानना है कि यह कांग्रेस की चाल है और वह उनका हौसला कम करना चाहती है।
जिस मूर्तियों की माया को बसाने के लिए बसपा के दिग्गजों ने सारे नियमों को ढेंगा दिख दिया हो  यूपी की जनता का लगभग 700 करोड़ रूपया लगा दिया है और मौका आते ही उस पर पर्दा डलाने की बात की जाने लगे तो बसपा का यह आक्रोश लाजिमी है। पार्क और मूर्तियां बनाने का यह खेल जब से बसपा की सरकार आई तभी से चल रहा है। इन मूर्तियों को स्थापित करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय की नोटिस की अवहेलना की जाती है और तर्क दिया जाता है कि राजधानी के पास एक सेंटर बनाया जा रहा है जो सामाजिक परिवर्तन लाने वालों के प्रति लोगों की आस्था का केंद्र बने। अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल भारत में सामाजिक परिवर्तन लाने में कबीरदास, संत रविदास, संत घासीदास, बिरसा मुंडा, नारायण गुरू, महात्मा ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज, गौतम बुद्ध, बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर, कांशीराम और मुख्यमंत्री मायावती का ही योगदान रहा है? भारतीय राजनीति की यह बिडंबना है कि यहां मूर्तियों लगाकर, विश्‍वविद्यालयों और जिलों के नाम बदलकर अपनी राजनीतिक धरोहर को संजोने के प्रयास किए जाते हैं।

No comments:

Post a Comment